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गुरुवार, 7 अगस्त 2014

[भारतमित्र मंच द्वारा आयोजित जुलाई की मासिक प्रतियोगिता में विजेता का सम्मान प्राप्त ]-हार्दिक धन्यवाद भारतमित्र मंच

[भारतमित्र मंच द्वारा आयोजित जुलाई की मासिक प्रतियोगिता में  विजेता का सम्मान प्राप्त ]




5 टिप्‍पणियां:

BLOGPRAHARI ने कहा…

आपका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क

BLOGPRAHARI ने कहा…

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Virendra Kumar Sharma ने कहा…

वर्ण -आश्रम है हमारा धर्म। हमारे स्वाभाव पूर्वजन्म के संस्कार के अनुसार चार वर्ण बतलाये गए हैं ब्राह्मण -क्षेत्रीय -वैश्य -शूद्र। जो श्रोत्रिय है उपनिषद का ज्ञाता है वह ब्राह्मण है जो इस ज्ञान के अतिरिक्त ब्राह्मणों की शेष समाज की सुरक्षा के लिए निमित्त है वह क्षत्रीय है जो कृषिकर्म करता है व्यापार करता है वह वैश्य है और जो सभी की समभाव सेवा का निमित्त बनता है वह शूद्र है। इस व्यवस्था में अपने पुरुषार्थ सेल्फ एफर्ट से शूद्र को प्रोन्नति करके ब्राह्मण बनने का अवसर उपलब्ध था क्योंकि यह व्यवस्था स्वभाव और गुणों के अनुरूप थी।ऊपर से नीचे भी व्यक्ति आता था आचरण में गिरावट के बाद। यह जन्म प्रधान व्यवस्था न होकर स्वभाव संस्कार प्रधान व्यवस्था थी ताकि समाज सुव्यवस्थित रूप चलता रहे। उसे हर व्यक्ति से महत्तम योगदान प्राप्त होता रहे।

आश्रम जीवन की विभिन्न अवस्थाएं हैं ब्रह्मचर्य (शिक्षा अर्जन ,सेलीबेसी ),ग्राहस्थ्य ,वनप्रवास (वानप्रस्थ )और संन्यास (रिनन्शिएशन ).

आधुनिक लिविंग टुगेदर इस आश्रम व्यवस्था का विचलन है डीवीएसशन है। जीवन यापन का यह निम्न स्तर है मानवेतर जीवों (पशुओं की तरह )इंस्टींक्टिव लिविंग है यह।

बढ़िया आलेख और पुरुस्कृत होने के लिए आपको पुनश्च बधाई।

वीरुभाई ,५१ १३१ ,अपलैंड व्यू स्ट्रीट ,

कैन्टन (मिशिगन )

४८ १८८ -३४८५

एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :

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Digamber Naswa ने कहा…

आपको बहुत बहुत बधाई ...

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ