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शनिवार, 20 जून 2015

दैनिक जागरण के जागरण जंक्शन में प्रकाशित 21.6.2015 को

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आजकल चारों तरफ भारत में बस एक ही चर्चा है कोई कह रहा है कि हम इसमें शामिल होंगे तो कोई कह रहा है हम इसे नहीं मनाएंगे इशारा है केवल और केवल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तरफ जिसे भाजपा भुनाने की मुहीम में जुटी है .देश की संस्कृति में सदियों से रची बसी इस अमूल्य निधि को हड़पने की कोशिश में भाजपा अपने तन मन से जुट गयी है .ठीक वैसे ही जैसे राम मंदिर को और राम को अपनी निधि भाजपा ने ऐसे दिखाया कि अगर कोई और आज के समय में ''जय श्री राम '' का उच्चारण कर ले तो फ़ौरन भाजपाइयों को अपनी सत्ता पर खतरा महसूस होने लगता है और वे फ़ौरन कुत्सित राजनीतिक टिप्पणियों पर आ जाते है जैसे राम नाम लेने का अधिकार केवल भाजपा को है .ऐसे में सिवाय इसके और क्या कहा जा सकता है कि जो राम को ही न समझा वह उनका हो ही कैसे सकता है जबकि राम ने तो मानव मात्र में भेद न करना ही सिखाया था और ये तो भाई-भाई में ही भेदभाव को पैदा कर रहे हैं .ऐसे ही योग को अपनी बपौती मानते हुए आज ये केवल योग योग का उच्चारण कर रहे हैं और ऐसा दिखा रहे हैं जैसे योग के ये ही मालिक हैं और इनका यह दिखाना ही इस देश में योग के लिए ऐसे ऐसे बयानों को जन्म दे रहा है जिनका योग के गुण-प्रभाव से दूर दूर तक भी कोई नाता नहीं है .जहाँ तक हम सब योग के बारे में जानते हैं यह कोई साधना की पद्धति नहीं है यह आज के तनावपूर्ण भौतिकवादी जीवन से मनुष्य मात्र को शांति पहुँचाने का एक साधन है और शरीर के अंगों पर पड़ते जीवन के काम-काज के दुष्प्रभाव दूर करने के लिए इसे हमारे ऋषियों-मुनियों द्वारा आज़माया जाता रहा है और इसलिए इसका इस्तेमाल हमेशा से भारत में होता रहा है किन्तु भाजपा को देश की ऐसी अमूल्य निधियों को हड़पने की हमेशा से महत्वाकांक्षा रही है जिसके माध्यम से वह यहाँ के एक समुदाय को अपनी ओर खींचकर उसके मन में दुसरे समुदाय के प्रति द्वेषभाव भर सके और वह इसीका माध्यम अब योग को बना रही है और इसी कारण योग को लेकर गलत और जहर भरी बयान बाजी हो रही है और भाजपा इसे निरंतर तूल दे रही है कभी प्रधानमंत्री के योग के समाचार आ रहे हैं कभी अमित शाह पटना में मुस्लिम योग टीचर से विशेष प्रशिक्षण की बात कर रहे हैं कभी रविशंकर प्रसाद ,रूडी ,राधा मोहन सिंह ,राम कृपाल यादव के पटना में विशेष योग कैम्प में शामिल होने की बातें समाचारों में आ रही हैं आखिर क्यों केवल योग योग को ही गाया जा रहा है जून में और भी दिवस इस बीच में पड़े हैं किन्तु उनमे भाजपा ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई न ही कोई कार्यवाही उनके सम्बन्ध में हुई .वे दिवस इस प्रकार हैं -
५ जून -विश्व पर्यावरण दिवस
८ जून -विश्व महासागर दिवस
१२ जून -विश्व बालश्रम निरोध दिवस
१४ जून -विश्व रक्तदान दिवस
१५ जून -World Elder Abuse Awarness Day
१७ जून -World Day to Combat Desertification
२० जून -विश्व शरणार्थी दिवस
२१ जून -विश्व योग दिवस
इनका अवलोकन किये जाने पर हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि न तो १२ जून को बालश्रम के समबन्ध में भाजपा ने कोई स्वस्थ प्रतिक्रिया दी न १४ जून को भाजपाइयों ने रक्तदान किया और ही अन्य दिवसों में कोई सार्वजनिक कार्यक्रम के जरिये इनपर कोई सन्देश जनता तक पहुँचाया गया .केवल योग योग को ही गाकर भाजपा इसे अपनाना चाह रही है और इसे राम मंदिर की तरह इस देश में अपने वोट बैंक में शामिल करना चाह रही है जबकि यह हमेशा से इस देश और देशवासियों की निधि रहा है और रहेगा .हिन्दू मुस्लिम को इस तरीके से बाँटने की भाजपा की राजनीति इस देश में नहीं चल पायेगी यहाँ हिन्दू भी योगी रहा है और मुस्लिम भी .
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सम्राट अकबर की जीवन चर्या और हमारे योगियों की जीवनचर्या यहाँ योग पर ही आधारित रही है और ये दोनों हिन्दू-मुस्लिम के दिलों दिमाग पर रहना ही चाहिए न कि भाजपा की हडपों और बांटों की राजनीति .
[दैनिक जागरण के जागरण जंक्शन में प्रकाशित 21.6.2015 को]
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 4 जून 2015

published in janvani ''pathakvani '' 4 june 2015


मॉनसून देगा इस बार भी धोखा
'अच्छे दिन ' जाने वाले हैं ,मौसम विभाग ने दिए सूखे के संकेत ,17 साल पुराने केस में BJP विधायक समेत 15 दोषी,पी ओ के में पाक की 'चुनावी चाल' से भारत नाराज़ ,हद है! चलती रोडवेज बस में युवती से फिर गंदी हरकत [सभी अमर उजाला से साभार ]
रोपड़ व काठगढ़ के बीच युवक ने बदतमीजी शुरू कर दी
प्रधानमंत्री मोदी जी कहते हैं कि 'देश के अच्छे दिन आ गए ''.वे देश में अच्छे दिन लाने का वादा कर सत्ता में आये हैं और ये तो साफ है कि वे अपने वादे को पूरा करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं और इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी फ़ौज को लगा रखा है लेकिन सच्चाई को नकारना न तो उनके हित में है और न ही देश के .समाचार पत्र के जिस पेज पर उनकी अच्छे दिन आने की सूचना को मात्र एक छोटा कॉलम मिला है उसी पेज पर इस सच्चाई को पूरा पेज मिला है कि देश की वास्तविक स्थिति इस वक्त क्या है ?'' देवबंद के पी.एन.बी.में १०.६१ लाख रूपये की डकैती ,बी.एस.एन .एल .कर्मी ने दफ्तर में जहर खाकर दी जान ,तीसरी बार लीक हुआ यूपीटीयू का पेपर '' ये तो आज के समाचार हैं और समाचार तो अभी जानते ही हैं -पश्चिमी यु पी में बारिश से फसल बर्बाद ,किसानों द्वारा रोज आत्महत्याओं का बढ़ता आंकड़ा ,रोज बढ़ती जा रही रेप की घटनाएँ ,दंगों के कारण खाली होते वेस्ट यु पी के कसबे , पाकिस्तान की बढ़ती जा रही कारगुजारियां ,महंगाई के कारण आम आदमी से छिनती रोटी -दाल और न जाने क्या क्या रोज समाचार पत्रों में पढ़ रहे हैं और स्वयं अपने आस पास देख भी रहे हैं अगर ऐसे हालत को देखते हुए देश के अच्छे दिन कहे जा सकते हैं और एक विशाल बहुमत लेकर जननायक के तौर पर उभरने वाले मोदी जी को वे ' देश के अच्छे दिन ' लग सकते हैं तो शायद ऐसा ही होगा क्योंकि वे गलत कैसे हो सकते हैं उनके जैसा प्रधानमंत्री न पहले कभी देश को मिला है और न ही मिलेगा जो जनता के जलते दिल-उजड़ती ज़िंदगी को देश के अच्छे दिन कहेगा .इसलिए ऐसे में तो बस यही कहा जा सकता है -
''दुश्मन न करे दोस्त ने जो काम किया है ,
उम्र-भर का गम हमें ईनाम दिया है .''
[PUBLISHED IN JANVANI'S PATHHAKVANI ON 4 JUNE 2015]

शालिनी कौशिक
[कौशल ]