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सोमवार, 10 मार्च 2014

दैनिक जागरण पाठकनामा में १० मार्च २०१४ को प्रकाशित

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चुनावों की उद्घोषणा हो गयी और सत्ता-सुंदरी को पाने में लगे देश के दो प्रमुख दल अपने कारनामे जनता के समक्ष खुलेआम करने लगे .केजरीवाल की आप तो आयी ही भारतीय राजनीति में उथल -पुथल मचाने है और उसे उसके मंसूबों में सफल होने में भाजपा इस तरह से सहयोग करेगी इसकी झलक तो बहुत पहले ही दिल्ली विधानसभा में भाजपा की किरकिरी में दिखाई दे गयी थी .आप राजनीति में नयी है और उसका अभी इसी कारण कोई राजनैतिक इतिहास नहीं है इसलिए वह जिस पर जो चाहे इलज़ाम लगा सकती है और इसलिए उसने अपने को प्रसिद्ध करने के लिए कॉंग्रेस और भाजपा इन दोनों दलों को घेरने व बदमान करने की रणनीति अपनायी और चूँकि राजनीति के दिग्गज जानते हैं कि इस तरह की आरोपों से राजनीतिज्ञों को दो-चार होना ही पड़ता है इसलिए वे मीडिया के सामने ही अपनी भड़ास निकाल लेते हैं अंदर से इस सम्बन्ध में कोई वैरभाव नहीं रखते क्योंकि खुद वे भी तो यही सब करते ही रहते हैं किन्तु जहाँ इस तरह के आरोपों पर पार्टी व् उसके कार्यकर्ता गम्भीर हो तो वहाँ चोर की दाढ़ी में तिनका नज़र आना स्वाभाविक है .आज तक देश में हुए विकास कार्यों को नकारकर बस अपने गुजरात के विकास के गुणगान करने वाले मोदी के गुजरात विकास मॉडल पर ही जब केजरीवाल ने ऊँगली उठा दी और उसकी असलियत जनता के सामने रखने की कोशिश की तो मोदी का और उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार प्रोजेक्ट करने में लगे भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं का तिलमिलाना स्वाभाविक भी था और दाल के भीतर के काले को दिखने के लिए पर्याप्त भी .अब देश भर में आप व् भाजपा भिड़ी हुई है और वह जनता जो इनके हाथों में देश सौंपने के मंसूबे रखती है वह सोच के गहरे भंवर में आखिर देश के सँभालने के बड़े बड़े दावे करने वाले इन परिस्थितियों तक को नहीं संभाल पा रहे ये देश क्या खाक संभालेंगे .
शालिनी कौशिक
[एडवोकेट ]
कांधला [शामली ]

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