लेखन न केवल शौक बल्कि ज़िंदगी को जीने की ज़रुरत बन गयी है .नहीं बर्दाश्त कर पाती हूँ बहुत कुछ ऐसा अनर्गल प्रलाप जो कोई भी किसी भी कुछ न कहने वाले को कहे जाये और बस वहीँ चोट करती हूँ जहाँ देखती हूँ कि अत्याचार कुछ ज्यादा बढ़ रहा है और पा जाती हूँ समाचार पत्रों में स्थान और उस स्थान को कैसे सहेजूँ तो बना लिया एक ब्लॉग और किया आपसे इसको भी साझा .आप मेरे इस प्रयास के बारे में क्या सोचते हैं ज़रूरी समझें तो बताएं अवश्य .
फ़ॉलोअर
बुधवार, 18 मार्च 2015
सोमवार, 23 फ़रवरी 2015
सोमवार, 26 जनवरी 2015
शुक्रवार, 23 जनवरी 2015
मंगलवार, 13 जनवरी 2015
रविवार, 4 जनवरी 2015
सदस्यता लें
संदेश (Atom)