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बुधवार, 8 फ़रवरी 2023

तुलसीदास का पुरूष अहं दैनिक जनवाणी दिनाँक 08 फ़रवरी 2023

 

एक संस्कृत उक्ति है -

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता."
      किन्तु केवल पुस्तकों और धर्म शास्त्रों तक ही सिमट कर रह गई है यह उक्ति. सदैव से स्त्री को पुरुष सत्ता के द्वारा दोयम दर्जा ही प्रदान किया जाता रहा है. धर्म शास्त्रों ने पुरुष के द्वारा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को उसकी धर्मपत्नी के अभाव में किए जाने की स्वीकृति नहीं दी और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमने श्री राम द्वारा अश्वमेघ यज्ञ के समय उनके वामांग देवी सीता की विराजमान मूर्ति के रूप में देखा है. हमने अपने बाल्यकाल में गार्गी, अपाला जैसी विदुषियों का मुनि याज्ञवल्क्य जैसे महर्षि से शास्त्रार्थ के विषय में भी पढ़ा है किन्तु धीरे धीरे नारी को दबाने का चलन बढ़ा और इसके लिए ढाल बने महाकवि तुलसीदास, जिन्होंने श्री रामचरितमानस में लिख दिया 
           "ढोल, गँवार, शूद्र, पशु, नारी - 
                     ये सब ताड़न के अधिकारी" 


      अब तुलसीदास जी के इस लिखे को पढ़े लिखों ने अपने हिसाब से, अनपढ़ों ने अपने हिसाब से, पुरूष समुदाय ने अपने दिमाग से, नारी वर्ग ने अपने दिल से, सभ्य समाज ने सभ्यता की सीमाओं में, असभ्य - अभद्र लोगों ने मर्यादा की सीमाएं लाँघकर वर्णित किया, किंतु सबसे ज्यादा मार पड़ी नारी जाति पर, जिसका योगदान महाकवि के द्वारा रचित पवित्र पुण्य महाकाव्य श्री रामचरित मानस में सर्वाधिक था और उसी नारी जाति के लिए महाकवि दो शब्द धन्यवाद के लिखने के स्थान पर यह कई अर्थ भरी उक्ति लिख गए. अब नारी जाति का श्री रामचरित मानस लिखने मे क्या योगदान है, यह भी समझ लिया जाना चाहिए -
      बाल्यकाल से ही तुलसी के जीवन में संघर्ष रहा, माता पिता का सुख तो कभी नहीं मिला क्योंकि वे मूल् नक्षत्र में पैदा हुए थे और पैदा होते ही उनकी माता जी के स्वर्गवास होने पर पिता ने उन्हें त्याग दिया था. मामा के घर रहे वहां  शिक्षा का समय आ गया, वह भी पूरी कर ली। लेकिन जब इनका विवाह बनारस की एक बड़ी सुंदर स्त्री, रत्नावली से हुआ, पहली बार अपना परिवार पाया, तो पत्नी के प्रति आसक्ति कुछ अधिक ही हो गई। एक बार पत्नी मायके गई, अब पत्नी से मिलने की इच्छा में रात में ही पत्नी से मिलने पहुँच गए, द्वार बंद पाया तो पत्नी तक पहुंचने के लिए तेज बारिश में साँप को रस्सी समझकर उसे ही पकड़कर ऊपर चढ़ गए. पत्नी रत्नावली ने पति को ऐसे आया देखा तो उसे पति तुलसीदास पर बहुत क्रोध आया और उसने जो कहा वह पति तुलसीदास के लिए प्रभु का संदेश बन गया 
       "लाज न आवत आपको, 
             दौरे आयहू साथ, 
       धिक-धिक ऐसे प्रेम को 
          कहा कहहुं मैं नाथ. 
      अस्थि चर्ममय देह मम 
          ता में ऐसी प्रीती 
      तैसी जो श्रीराम में 
          कबहु न हो भव भीती." 



     अर्थात तुलसीदास जी से उनकी पत्नी कहती हैं, कि आपको लाज नहीं आई जो दौड़ते हुए मेरे पास आ गए।
हे नाथ! अब मैं आपसे क्या कहूँ। आपके ऐसे प्रेम पर धिक्कार है। मेरे प्रति जितना प्रेम आप दिखा रहे हैं उसका आधा प्रेम भी अगर आप प्रभु श्री राम के प्रति दिखा देते, तो आप इस संसार के समस्त कष्टों से मुक्ति पा जाते. 
इस हाड़-माँस की देह के प्रति प्रेम और अनुराग करने से कोई लाभ नहीं। यदि आपको प्रेम करना है, तो प्रभु श्री राम से कीजिए, जिनकी भक्ति से आप संसार के भय से मुक्त हो जाएंगे और आपको मोक्ष की प्राप्ति हो जायेगी।" 
          और पत्नी रत्नावली का यह कहना मात्र ही तुलसीदास जी के जीवन का ध्येय बन गया और उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन चरित पर आधारित युगान्तरकारी कालजयी ग्रंथ श्री रामचरित मानस की रचना की किन्तु अपने पुरुष अहं को ऊपर रखते हुए पत्नी - नारी रत्नावली का धन्यवाद अर्पित नहीं किया और लिख गए नारी को ताड़न की अधिकारी - जिसे भले ही सभ्य समाज कितना सही रूप में परिभाषित कर नारी के पक्ष में प्रचारित कर ले, असभ्य-अभद्र समाज नारी की ताड़ना करता ही रहेगा नारी को अपमानित करता ही रहेगा क्योंकि भले ही लव कुश ने अपनी माता सीता का सच्चरित्र अयोध्या वासियों के सामने रख दिया हो, भले ही महर्षि वाल्मीकि ने रामायण का सुखद अंत किए जाने की चेष्टा में अपना सारा पुण्य ज्ञान लगा दिया हो किन्तु माता सीता को तो धरती माँ की गोद में ही समाना पड़ा था. इसलिए महाकवि तुलसीदास जी का पुरुष अहं नारी समुदाय पर सदैव भारी हो पड़ेगा. 
शालिनी कौशिक 
      एडवोकेट 
कैराना (शामली) 




सोमवार, 26 दिसंबर 2022

श्री राहुल गांधी - एक महान राष्ट्रनायक दैनिक जनवाणी दिनाँक 27 दिसंबर 2022

  



        श्री राहुल गांधी जी आज भारत में कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक आम भारतीयों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ चुके हैं. भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी ने भारत को तोड़ने का इरादा रखने वालों के दिलों को बहुत तगड़ा झटका दिया है और इसी कारण राहुल गांधी जी के विरोधी कभी राहुल गांधी द्वारा महिलाओं, ल़डकियों से हाथ मिलाने को लेकर उन पर कटाक्ष करते हैं तो कभी यात्रा में मात्र सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी बताकर राहुल गांधी जी के भारत जोड़ने के प्रयास की हँसी उड़ाते हैं ऊपर से गोदी मीडिया के द्वारा भरसक कोशिश की जाती है कि भारत जोड़ो यात्रा को भारत में कोई प्रचार न मिले किन्तु आज भारत जोड़ो यात्रा एक क्रांति बन चुकी है और इतिहास गवाह है कि क्रांति कभी दबाई नहीं जा सकती है बल्कि क्रांति को जितना दबाया जाता है वह उतना ही रौद्र रूप लेकर उभरती है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम इसकी गवाही देता है और आज भारत जोड़ो यात्रा भी एक ऐसी ही क्रांति बन गई है जिसमें कॉंग्रेस पार्टी के युवा नेता पूर्व कॉंग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी ने अपनी पूरी जीवन शक्ति लगा दी है.

                  कन्याकुमारी से आरंभ होकर भारत जोड़ो यात्रा जैसे ही उत्तर की ओर बढ़ी, सियासी हल्कों में हलचल आरंभ हो गई और राजस्थान में उमड़ पड़े जनसमुदाय ने राहुल गांधी जी के विरोधियों में आग सी लग गई और शुरू हो गई कोरोना के फैलने की खबरें. जिस भारत जोड़ो यात्रा में अब तक विरोधियों के अनुसार इक्का-दुक्का ही लोग आ रहे थे उसे रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्री राहुल गांधी जी को भारत जोड़ो यात्रा रोकने के लिए पत्र लिखने बैठ गए.

      यही नहीं राहुल गांधी जी की राष्ट्रीयता यहीं पर नहीं रुकी बल्कि यात्रा के दिल्ली आने पर वे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के समाधि स्थल पर गए और यहां उन्होंने एक बार फिर दिखा दिया कि उनमें है वह भावना-जो एक सच्चे और महान राष्ट्रनायक में होनी चाहिए.

      राहुल गांधी सर्वप्रथम अपने पिता और देश के सातवें प्रधान मंत्री स्व श्री राजीव गांधी जी की समाधि स्थल वीर भूमि पर गए, इंदिरा गांधी जी की समाधि शक्ति स्थल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट, पंडित नेहरू की समाधि शांति वन, लाल बहादुर शास्त्री जी की समाधि विजय घाट, चौधरी चरण सिंह जी की समाधि स्थल किसान घाट पर गए, पर यह कोई महान कार्य नहीं था क्योंकि ये सभी कॉंग्रेस पार्टी के आदर्श चरित्र और नेता रहे हैं, राहुल गांधी जी की महानता कही जाएगी उनका भाजपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी की समाधि स्थल सदैव अटल पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित करना. ऐसा नहीं है कि स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी उनकी श्रद्धांजली के पात्र नहीं थे, अटल बिहारी वाजपेयी जी सदैव भारतीयों के हृदय में सम्मान के पात्र हैं और रहेंगे किन्तु देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जी क्या भाजपाई प्रधानमंत्री और भाजपाई राष्ट्रपति के द्वारा सम्मान के पात्र नहीं होने चाहिए. वर्तमान और  वर्ष 2000 के बाद का देश का इतिहास गवाह है भाजपा द्वारा बनाए गए पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जी के जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर देश में कहीं और का प्रवास कार्यक्रम तय कर लेते थे और इनकी समाधि स्थल पर जाकर अपनी पुष्पांजलि अर्पित नहीं करते थे और यही रवैय्या भाजपा के वर्तमान नेतृत्व का है जो देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले कॉंग्रेस पार्टी के इन महान प्रधानमंत्रियों की जयंती और पुण्यतिथि पर ट्विटर पर ट्वीट द्वारा ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं.

        ऐसे में, एक राष्ट्रनायक वही होना चाहिए जो दलगत राजनीति से परे रहता हो, केवल राष्ट्र का सम्मान ही सर्वोपरि रखता हो और कॉंग्रेस पार्टी से जुड़े होने पर भी राहुल गांधी के द्वारा भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की समाधि पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित करना उन्हें राष्ट्रनायक की छवि प्रदान करता है और एक आम भारतीय आज उनमें अपने भारत राष्ट्र का महान नायक होने का अक्स देख रहा है. राहुल गांधी जिंदाबाद 🇮🇳

शालिनी कौशिक

 एडवोकेट

कैराना (शामली)