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गुरुवार, 8 मई 2014

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में 8 मई २०१४ को प्रकाशित

मन नहीं करता किन्तु बहुत सी बार अपनी इच्छा के विरुद्ध भी बहुत से कार्य करने पड़ते हैं .राजनीति न कभी एक आम आदमी के जीवन में कोई स्थान रखती है और न ही कभी रखेगी .बहुत बार स्वयं को रोका कि क्यूँ इस विषय पर मैं लिखकर अपना समय बर्बाद कर रही हूँ किन्तु न कभी गलत का साथ दिया है और न ही दूँगी और मन में यही दृढ इच्छाशक्ति होने के कारण  नरेंद्र मोदी जैसे शख्स के बिना बात ही गाल बजने वाले वक्तव्यों का जवाब देने मैं भी बार बार इस जंग में कूद पड़ती हूँ क्योंकि जानती हूँ कि जिस परिवार के खिलाफ अनर्गल प्रलाप कर वह अपनी लहर दिखा रहा है अपनी वीरता दिखा रहा है वह मात्र असभ्यता की पराकष्ठा है और कुछ नहीं
आज देश में लोकसभा चुनाव २०१४ के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों का अभियान जारी है और कोई दल भ्रष्टाचार  के खिलाफ तो कोई महंगाई के खिलाफ ये चुनाव लड़ रहा है किन्तु एक मात्र प्रधानमंत्री पद का घोषित उम्मीदवार अपने लिए कोई मुद्दा रखता ही नहीं उसके पास अपने को चर्चा में बनाये रखने का बस एक मुद्दा है ''चुनाव बाद गांधी परिवार की राजनीति खत्म हो जाएगी ''और इस जंग में वह केवल इसी परिवार के खिलाफ लड़ रहा है क्योंकि कांग्रेस को तो वह इस परिवार के सामने बेचारी करार देते है वह नरसिंह राव को बेचारा कहते  है ,वह सीताराम केसरी को बेचारा कहते  है ज्यादा दूर नहीं जब वह अपने को भी बेचारा कहेगा क्योंकि जिस परिवार की राजनीति ख़त्म करने की वह बात कर रहे हैं वह कोई राजनीति करता ही नहीं है वह केवल और केवल देश सेवा करते हैं .
पंडित जवाहर लाल नेहरू को आज ये अवसरवादी कुछ भी कह लें किन्तु और सब बातें और उनकी देश सेवा को यदि हम एक तरफ रखने की एहसान फरामोशी कर भी लें तब भी वे महात्मा गांधी की पसंद थे और महात्मा गांधी वे महान आत्मा थे जिन्होंने देश को केवल दिया बदले में कुछ नहीं लिया और उनकी पसंद पर ऊँगली उठाना उनकी देश सेवा पर ऊँगली उठाना है .
इंदिरा गांधी देश की आज तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री हम यदि इनके इस परिवार की होने के नाते प्रधानमंत्री बनने की बात एक तरफ रखकर अपने विचारों को महत्व दे भी दें तब भी बैंकों का राष्ट्रीयकरण ,अग्नि मिसाइल ,और तो और ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए हम अपनी शक्ति स्त्रोत इंदिरा जी को कभी भी अनदेखा नहीं कर सकते ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण उन्हें अपने प्राण तक गवाने पड़े किन्तु सभी जानते हैं कि इस वीरता के कार्य को वे ही अंजाम दे सकती थी और उनका ये कदम हम सभी के लिए आज भले ही सूक्ष्म महत्व का हो किन्तु जब इंदिरा जी ने इस कार्य को किया तब स्वर्ण मंदिर में हथियार इक्कठा किये जाने की ख़ुफ़िया रिपोर्ट थी और ख़ुफ़िया रिपोर्ट पर ऐसी सशक्त कार्यवाही इंदिरा जी ने ही की और इसके महत्व को हम कृतघ्न की भांति कभी भी अस्वीकार नहीं कर सकते .
राजीव गांधी कभी भी राजनीति में नहीं आते यदि उनके छोटे भाई संजय जीवित रहते किन्तु राजीव जी इस परिवार की संतान थे और इस परिवार की संतान कभी भी भारतीय संस्कृति की अवहेलना नहीं कर सकती .वे राजनीति में आये और उन्होंने देश को संचार क्रांति द्वारा एक नए युग में पहुचाया ,आज युवा वोट डालकर अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ये अधिकार १८ वर्ष के युवाओं को राजीव गांधी ने ही दिलाया था .
सोनिया गांधी जिन्हें हमारे देश की जनता ने अपनाया किन्तु ये अपनाना यहाँ के नेताओं को कभी नही भाया उन्होंने कभी उन्हें सत्ता की लालची तो कभी राजनीति की पिपासा रखने वाली दिखाना चाहा जबकि राजीव जी की हत्या के बाद वे राजनीति से ७ साल तक दूर रही
[ After her husband's assassination in 1991, she was invited by Congress leaders to take over the government;[5] but she refused and publicly stayed away from politics amidst constant prodding from the party. She finally agreed to join politics in 1997; in 1998, she was elected President of the Congress.[विकिपीडिया से साभार ]
और राजनीति में आई भी तब जब अपने पुरुखों द्वारा अपने खून पसीने से सींची गयी पार्टी को कुछ छुटभैयों नेताओं द्वारा पतन की ओर जाने की दशा में देखा और वे आई .उनका आना किसी भी विपक्षी पार्टी को नहीं भाया क्योंकि वे सब सोच चुके थे कि अब कांग्रेस का सफाया हो गया है अब यह कभी नहीं उठ पायेगी .ऐसे में जबकि राजीव जी को बम विस्फोट द्वारा मार दिया गया और देश में चारों ओर दुःख की लहर थी तब भी इस भाजपा को केवल राजनीति ही सूझ रही थी इनके युगपुरुष तब भी जीवन की नश्वरता नहीं अपितु अपने लिए सत्ता की कुर्सी देख रहे थे उन्होंने कहा -''कांग्रेस स्थिरता की बात करती थी आज खुद ही अस्थिर हो गयी .''.अब ऐसे में जबकि सोनिया जी भी राजनीति से दूर थी तब सभी की नज़रों में कांग्रेस का महत्व समाप्त हो गया था तब सोनिया जी के आने पर कांग्रेस का दोबारा उठ खड़ा होना इनकी छाती पर सांप लौटने के लिए पर्याप्त ही कहा जायेगा और रही बात उनकी राजनीति को तो उन्होंने कभी राजनीति नहीं की वे राजनीति में इंसानियत को ही जीवित करती आई हैं और यह उन्होंने २००४ में प्रधनमंत्री पद ठुकरा कर साबित भी कर दिया भले ही विपक्षी अपने मन की संतुष्टि के लिए इसे कुछ भी कह लें किन्तु वह विदेश मीडिया जिसे आज नरेंद्र मोदी के ख़बरें लेते प्रसारित करते दिखाया जा रहा है उसी विदेशी मीडिया ने सोनिया जी के इस कार्य की सम्पूर्ण विश्व में प्रशंसा की थी और किसी भी हस्ती द्वारा किये जाने वाला त्याग का अनुपम उदाहरण बताया था .
राहुल गांधी को तो इन विपक्षियों ने अभद्रता की हदें पार करते हुए बहुत कुछ कहा है किन्तु वे भारतीय संस्कारों में बंधे हैं और ऐसा नहीं है कि कहते नहीं कहते हैं किन्तु उतना ही जितना विपक्षी को उसके कथनों का आईना दिखाने हेतु पर्याप्त हो और उनके लिए भी यहाँ केवल देश सेवा का महत्व है किसी पद का नहीं क्योंकि सारी सरकार हाथ में होते हुए भी मंत्री पद तक न लेना किसी महान देशभक्त द्वारा ही हो सकता है और रही बात विपक्षी द्वारा उनकी काबिलियत पर ऊँगली उठाने की तो सब जानते हैं कि यहाँ कितने मंत्री काम करते हैं काम सारी आई.ए.एस.लॉबी करती है इनका काम केवल हस्ताक्षर करना होता है और जब बिलकुल अनुभवहीन ऐसा कर सकते हैं तब राहुल गांधी की योग्यता को इस तरह से तो सस्ते आरोपों के घेरे में तो नहीं लाना चाहिए जबकि वे अब दस साल से संसद होने की योग्यता वाले हैं .
आज मोदी बस इस परिवार के खिलाफ आग उगलने में लगे हैं .प्रियंका गांधी ने उनके खिलाफ  मोर्चा संभाला तो उन्होंने पहले तो बेटी कहकर अपने को उनसे बचाना चाहा किन्तु स्वयं उनके पिता -माँ के खिलाफ ऐसी टिप्पणी  करते रहे कि वे कुछ भी कहें और ये पकड़कर अपने लिए कुछ तो राह बनायें क्योंकि मीडिया प्रियंका के आते ही इनकी बकवास से हटता जा रहा था .
[बता दें कि सोमवार को मोदी ने चुनावी सभा में कांग्रेस के साथ राजीव गांधी पर भी कटाक्ष किया था। इसकी प्रतिक्रिया में प्रियंका गांधी ने कहा था, ‘मेरे पिता का अमपान किया गया है। इस नीच राजनीति का अमेठी की जनता जवाब देगी।’]
अपने ही कथनों द्वारा मोदी ने खुद को गलत साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है .देश में कोई जाति नीच है या उच्च इसे कोई और नहीं कह रहा आज वही इस शब्द को कहता फिर रहा है जिसे इसके माध्यम से कोई फायदा लेना है और मोदी ने यही पकड़ा और लगे अपने गाल बजाने और इस बात का अपने हिसाब से फायदा उठाने की जिस कोशिश का गुब्बारा वे फुलाकर फायदा लेना चाह रहे थे उसे पिछड़ा वर्ग की सशक्त हिमायती मायावती जी ने ही फोड़ दिया और उनसे पूछ लिया कि आखिर वे किस पिछड़े वर्ग से हैं और या सवाल उनसे उसी वर्ग की नेता ने पूछा है जिसका फायदा लेने की जुगत में लगे होने के कारण वे लगभग सभी पर कीचड उछालने में लगे होने के बाद और स्वयं मायावती जी द्वारा निरंतर स्वयं पर हमले होने के बावजूद भी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं क्योंकि वे उनका कोई अपमान नहीं करना चाहते शायद चुनाव बाद उनसे समर्थन की उम्मीद रखकर और क्योंकि इस गांधी परिवार से ऐसे किसी समर्थन की उम्मीद नहीं है और साथ ही इनकी खिलाफत कर स्वयं को परमवीर दिखाने की चाहत इसलिए अनर्गल कुछ भी बोलकर इनका अपमान करने में जुटे हैं जिन्होंने इस देश को केवल और केवल दिया है .आनंद भवन तो महज एक इमारत है इस परिवार ने देश के लिए बलिदान दिए हैं और इसे केवल भारतीय जनता और वह भी वो जो केवल भावनाओं के दम पर जीती है न कि स्वार्थ के ऊपर और जिसके लिए केवल और केवल भारतीय जनता के मन में यही भाव हैं -
''जाको राखे साइयां ,मार सके न कोय .''

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में 8 मई २०१४ को प्रकाशित

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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में २३ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित

मोदी जी पहले अपना घर देख लो 
A 40-year old dalit woman was burnt alive by a her relatives at Helodar village in Malpur taluka of Aravalli district over the quarrel about a love marriage.

एक दलित महिला ज़िंदा जला दी गयी कोई बहुत बड़ी खबर नहीं है बड़ी है केवल इसलिए क्योंकि  यह खबर उस राज्य से जुडी है जिस राज्य से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री नरेंद्र मोदी जी आते हैं और जिस राज्य के बारे में ये कहा जाता है कि वहां रात के दो बजे भी लड़की घूम सकती है वहां एक दलित महिला के साथ ऐसा होता है और ये भी तब जब स्वयं उसी के समुदाय के नरेंद्र मोदी जी राज्य के मुख्यमंत्री हैं .नरेंद्र मोदी जब पश्चिमी यू पी .में आते हैं तो यहाँ पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हैं ,दिल्ली जाते हैं तो नारी सुरक्षा में बड़े बड़े भाषण देते हैं ,यही नहीं स्वयं कहते हैं कि जिस दिन से उन्हें भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया उस दिन से मैं महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित हूँ और उस सम्बन्ध में उपाय सोच रहा हूँ .जिस राज्य की कमान वे तीसरी बार संभाल रहे हैं अगर वहां ऐसी घटना घटती है तब कैसे ये विश्वास किया जा सकता है कि वे इस संबंध में गंभीर हैं और उनके आने से वास्तव में अच्छे दिन आने वाले हैं .हाँ इतना अवश्य है कि उन्हें मीडिया पर नियंत्रण आता है क्योंकि मीडिया में कहीं भी इस खबर का चर्चा नहीं किया गया .ये खबर एक ब्लॉग लिखने वाले प्रबुद्ध ब्लॉगर द्वारा ही ज्ञात हुई तब इसे गूगल में सर्च करने पर मुश्किल से पता किया गया है .अपराधियों को संसद से बाहर करने का दावा करने वाले मोदी जी के ये कृत्य और अमित शाह जैसे तीन तीन खून करने वाले को अपने प्रचार अभियान का सर्वेसर्वा बनाना ही बताते हैं कि अब अपराधी संसद के कानून के दायरे से बाहर होंगे और मीडिया में प्रमुखता से .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में २३ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित

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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

जागरण जंक्शन में २ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित

जागरण जंक्शन में २ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित
[youtube]https://www.youtube.com/watch?v=tqyn1yC9ocw[/youtube]
''युवाओं को बेरोजगार रखने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी .हमारी बेटियों को सुरक्षा न देने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,महंगाई बढ़ने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,बिजली के लिए तरसाने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,''मोदी सरकार के लिए वोट करने की अपील करने वाले ये विज्ञापन जिन मुद्दों के लिए जनता का क्रोध दर्शा रहे हैं उनसे ये तो साफ ही है कि न तो जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है और न ही इन विज्ञापनों से मोदी सरकार को कोई सरोकार है .
भ्रष्टाचार जिसके लिए आज तक यू.पी.ए.सरकार पर निरंतर हमले हुए और जिसके कारण दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली ,देखा जाये तो वास्तव में कभी सत्ता हथियाने का मुद्दा बन ही नहीं सकता और क्योंकि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार मिटाने के दम पर सत्ता में आयी थी और उसका शासन कितना सफल रहा यह भी सबने देखा ,पहले तो वह ही मात्र ४९ दिन में अपने असफल मुद्दे की पूंछ पकड़कर भाग गयी दूसरे उसके लिए आगे सत्ता के लिए खुलने वाले सभी रस्ते हमेशा के लिए बंद हो गए क्योंकि ये हमारा देश गाँव में बसता है और गावों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को कभी कोई स्थान नहीं मिल सकता क्योंकि गावों के मुद्दे राजनीति में हमेशा से जाति-धर्म व् खेती ही रहे हैं बिजली चूँकि खेती के लिए पानी का जरिया है इसलिए वह गाँव वाले अपने दमपर हासिल करते हैं और बेटियों की सुरक्षा वे स्वयं लट्ठ के बल पर करते हैं इसके लिए किसी राजनीतिक दल की ओर नहीं देखते .इसलिए जाति-धर्म व् खेती जैसे मुद्दों का फायदा उठाकर ही आज तक सरकारें बनती आयी है .शहर वाले एक बार को भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर नए की पहल कर सकते हैं किन्तु गाँव में भ्रष्टाचार की बात प्रभावी नहीं क्योंकि ये तो पहले ही स्वयं तरकीब भिड़ाकर कार्य निकालने वाले होते हैं .इनका कहना होता है ''कि जैसे भी हो अपना काम होना चाहिए '' और इसलिए ये खुद भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा ही देने वाले होते हैं इसलिए दिल्ली जैसी जगह में भ्रष्टाचार के नाम पर भीड़ जुटाने वाले अन्ना भी यदि गावों में इसके लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करें तो पहले उनकी जाति-धर्म ही देखा जायेगा और यही बात भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी जी [इतना लम्बा ही परिचय देना होगा क्योंकि आज तक भी लहर के बावजूद मोदी जी की कोई पहचान नहीं है इसके सिवा इसलिए दूरदर्शन पर और अन्य चैनल पर भी इनसे सम्बंधित समाचार देने के लिए पहले इतना लम्बा परिचय देना ही पड़ता है जैसे अलीबाबा और चालीस चोर ]ने पकड़ ली और अपने को कभी चाय वाला तो कभी पिछड़ा कहकर भी प्रचारित किया जो कि आज और सब भी कर रहे हैं उनके द्वारा स्वयं इस स्वीकारोक्ति से पहले हम नहीं जानते थे कि वे पिछड़े हैं अब जान गए और ये उन्हें करना ही था जैसे कि आज वैसे तो अपने नाम के आगे उपनाम में कभी कुमार व् कभी देवी लिखते हैं क्योंकि अपने पिछड़ेपन से शायद शर्म आती है किन्तु जब सरकारी फायदे की बात आती है तो शर्म नमक कीड़ा छूमंतर फ़ौरन उसका प्रमाण पत्र बनवाने चल देते हैं ऐसे ही मोदी जी को इस वक़्त अपना पिछड़े होना फायदे का सौदा लगा और इसे प्रचारित करने लगे क्योंकि वे जानते हैं कि आज भी चाय का व्यवसाय अधिकांश वे ही जातियां कर रही हैं जो किसी न किसी तरह से पिछड़ी हुई हैं और चाय वैसे भी आज गरीबों का मुख्य पेय पदार्थ है ऐसे में चाय वाला कहलाकर मोदी जी का दोनों हाथ घी में और सिर कढ़ाई में ही रहने वाला है और इसलिए भाजपा को भी पिछड़ों की ही पार्टी कहना शुरू करा दिया जिसे कभी बनियों ब्राह्मणों की पार्टी कहा जाता था किन्तु मोदी ये भी जानते हैं कि आज दलितों -पिछड़ों की खैरख्वाह बहुत सी पार्टियां हैं और देश में अगर कोई मुद्दा सदाबहार है और किसी के दमपर यदि रातों रात प्रसिद्द हुआ जा सकता है तो वह नेहरू गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमले क्योंकि देश की जनता में अगर किसी परिवार का क्रेज़ है तो वह है इस परिवार का ,अगर किसी परिवार के बारे में जानने को वह अपनी रातों को जागकर बिता सकती है तो वह है नेहरू गांधी परिवार ,ऐसे में बेटियों की सुरक्षा ,महंगाई ,बिजली ,पानी ,जाति धर्म इनके लिए क्या महत्व रखते हैं ये कोई बच्चा भी जान सकता है और बेटियों या महिलाओं का इनकी स्वयं की नज़र में और इनकी पार्टी की नज़र में क्या महत्व है यह भाजपा के एक राजस्थानी नेता ने सोनिया गांधी व् ऱाहुल गांधी पर अपनी अभद्र टिप्पणी से बता ही दिया है और उसपर भाजपा और मोदी दोनों की ही तरफ से कोई अफ़सोस तक ज़ाहिर नहीं किया गया जबकि इन्ही के विज्ञापन में मोदी को लाने की अपील करने वाली नारी अपनी बेटी की सुरक्षा इनके कंधे सौंपने की बात कहती है शायद वह खुद भी नहीं जानती कि जिसकी सरकार लाने की वह बात कर रही है वह कॉंग्रेस को ख़त्म करने की बात तो करता है किन्तु उसके मन मस्तिष्क पर बस सोनिया -राहुल ही हावी हैं और वह किसी और मुद्दे को अपनी ज़बान देने की बजाय बस ''शहजादे और माता श्री '' ही रटता रहता है .
ऐसे में भला ये कैसे माना जा सकता है कि देश में कोई और मुद्दा है ?जिस चुनाव में एक मात्र प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के अनुसार जनता ने स्वयं पहली बार चुनाव परिणाम तय कर लिए हैं ,कॉंग्रेस किसी भी राज्य में दोहरे अंक में सीट नहीं मिलेगी ,सभी मोदी की ताजपोशी के इंतज़ार में हैं ,भ्रष्टाचार या अन्य किसी मुद्दे का मोदी से ऊपर कोई स्थान नहीं है तब जब हम सभी मोदी लहर में बहे जा रहे हैं तो ये लहर ही क्यूँ बार बार कांपती हुई सी शहजादे -माता श्री पर कंपायमान सी हो जाती है कहीं इस लहर से ऊपर भी कुछ और तो नहीं ,कहीं वही तो नहीं जिसके बार बार दोहराकर मोदी लहर बही जा रही है सच्चाई तो बस यही कही जा सकती है इस रटन पर -
''कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों ,
सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते .
तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो
पर फूल की खुश्बू समेट नहीं सकते .''

जागरण जंक्शन में २ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित 
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]